टमाटर में अधिक उपज एवं लाभ हेतु विकसित तकनीक का राष्ट्रीय स्तर पर अनुमोदन |
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सब्जी फसल) के अंतर्गत चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के शाकभाजी अनुभाग द्वारा विकसित टमाटर उत्पादन की एक उन्नत तकनीक को दिनांक 20–22 फरवरी, 2026 तक श्री कोंडा लक्ष्मण तेलंगाना बागवानी विश्वविद्यालय, हैदराबाद में आयोजित 44वीं वार्षिक समूह बैठक में अनुमोदित किया गया है। यह तकनीक सस्य वैज्ञानिक डॉ. राजीव द्वारा विगत तीन वर्षों (2022-23 से 2024-25) के सतत अनुसंधान एवं परीक्षणों के उपरांत विकसित की गई है। अनुसंधान कार्य शाकभाजी शोध प्रक्षेत्र, कल्याणपुर पर रबी मौसम में ‘काशी अमन’ प्रजाति पर किया गया। डॉ. राजीव द्वारा बताया गया कि टमाटर में वृद्धि नियामकों तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों के विभिन्न संयोजनों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। परिणामों के आधार पर यह पाया गया कि जिब्रेलिक अम्ल 50 पीपीएम का सूक्ष्म पोषक तत्व मिश्रण @ 0.5% के साथ रोपाई के 30 एवं 45 दिन बाद छिड़काव करने से सर्वाधिक फल संख्या (36.70 फल/पौधा), अधिकतम औसत फल भार (99.87 ग्राम), प्रति पौधा अधिकतम फल भार (2.45 किग्रा) तथा सर्वाधिक फल उपज 549.17 क्विंटल/हेक्टेयर प्राप्त हुई जो अन्य की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक रही।
डॉ राजीव द्वारा आर्थिक विश्लेषण के बारे बताया कि उक्त तकनीक से अधिकतम शुद्ध लाभ ₹4,02,573 प्रति हेक्टेयर तथा लाभ-लागत अनुपात 4.39 प्राप्त हुआ, जो अन्य उपचारों की अपेक्षा सर्वाधिक रहा। उन्होंने कहा कि टमाटर की फसल में अधिक उपज एवं अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए किसान अपनी फसल पर जिब्रेलिक अम्ल 50 पीपीएम एवं सूक्ष्म पोषक तत्व मिश्रण @ 0.5% को फसल रोपाई के 30 एवं 45 दिन पर छिड़काव करें। इस तकनीक को उत्तर प्रदेश सहित समान कृषि-जलवायु परिस्थितियों (जोन-IV) में टमाटर उत्पादक कृषकों के लिए अनुशंसित किया गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिक दल को बधाई देते हुए कहा कि यह तकनीक किसानों की आय में वृद्धि एवं सब्जी उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।