मौदहा में विशेष अभियान चलाकर एक बाल,किशोर श्रमिक को कराया गया मुक्त
बाल श्रम कराने वाले सेवायोजकों के विरुद्ध होगी सख्त कार्रवाई : जिलाधिकारी
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस हमीरपुर। जिलाधिकारी अभिषेक गोयल के निर्देशन में जनपद में बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 यथा संशोधित बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को मौदहा तहसील क्षेत्र में संयुक्त टीम द्वारा सघन बाल श्रम चिन्हांकन एवं प्रवर्तन अभियान संचालित किया गया।
अभियान के दौरान सीडब्ल्यूसी मजिस्ट्रेट श्रीमती विभा भारती, श्रम प्रवर्तन अधिकारी विजयपाल सोनकर, जिला समन्वयक चाइल्ड लाइन तथा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारी राकेश कुमार के नेतृत्व में हॉटस्पॉट क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर विभिन्न प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान एक सेवायोजक के यहां कार्यरत एक बाल/किशोर श्रमिक को मुक्त कराया गया तथा संबंधित सेवायोजक के विरुद्ध निरीक्षण टिप्पणी जारी करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
गौरतलब है कि शासन के निर्देशानुसार जनपद में 01 जुलाई से 31 अगस्त, 2026 तक विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत बाल एवं किशोर श्रमिकों के चिन्हांकन, अवमुक्तीकरण एवं पुनर्वास के साथ-साथ सड़कों पर रहने वाले एवं बेघर बच्चों के बचाव एवं पुनर्वास की कार्यवाही की जा रही है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जनपद के ढाबों, होटल-रेस्टोरेंट, केटरिंग प्रतिष्ठानों, हलवाई की दुकानों, शादी घरों, डीजे एवं गमला लाइट संचालकों सहित अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर बाल एवं किशोर श्रमिकों का चिन्हांकन कर नियमित अभियान चलाया जाए। साथ ही व्यापारिक संगठनों के सहयोग से जनजागरूकता बढ़ाते हुए बाल श्रम कराने वाले सेवायोजकों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अभियान के दौरान व्यापारियों एवं प्रतिष्ठान संचालकों को बाल श्रम निषेध संबंधी प्रावधानों की जानकारी देते हुए सचेत किया गया कि किसी भी नाबालिग बालक अथवा किशोर से कार्य कराना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिनियम के तहत 20 हजार रुपये से 70 हजार रुपये तक का जुर्माना तथा छह माह से दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
निरीक्षण के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों पर कार्यरत श्रमिकों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। अकुशल श्रमिक के लिए 12,356 रुपये, अर्धकुशल के लिए 13,590 रुपये तथा कुशल श्रमिक के लिए 15,224 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन निर्धारित है। इसका उल्लंघन पाए जाने पर न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अभियान में सीडब्ल्यूसी मजिस्ट्रेट श्रीमती विभा भारती, विजय शंकर श्रीवास्तव, श्रम प्रवर्तन अधिकारी विजयपाल सोनकर, जिला समन्वयक चाइल्ड लाइन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारी राकेश कुमार, कांस्टेबल मेघा मिश्रा, कांस्टेबल अजीत कुमार सचान, श्रम विभाग से विवेक मिश्रा, कंप्यूटर ऑपरेटर सैयद मोहम्मद उबैद उल्लाह तथा सूरजभान सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।