ऐसा फ्राड न देखा, न सुना होगा |
-सोशल मीडिया से पकडे़ गए 35 साल बाद केस्को के बाबू |
-केस्को ने शुरू की बाबू के अलग अलग बापों की जाँच |
-चेयरमैन यूपीपीसीएल के आदेश पर हो रही है 35 साल पुराने फर्जीवाड़े की जाँच |
-रिपोर्ट में केस्को बाबू के तीन बाप बताकर फँसी कानपुर यूनिवर्सिटी |
-हाईकोर्ट में केस्को बाबू ने अपने बाप के चार अलग अलग नामों का किया उल्लेख |
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | वर्ष 1990 में श्रमिक पद पर भर्ती हुए विजय त्रिपाठी पुत्र आर0 एम0 त्रिपाठी द्वारा वर्ष 1990 से लेकर वर्ष 1992 तक केस्को में श्रमिक पद का कार्य कर वेतन अर्जित करते रहे इसी दौरान केस्को से ही रिटायर्ड इसके पिता राम मनोरथ ने पुत्र विजय त्रिपाठी को बाबू बनाने के लिए केस्को प्रबंधन पर ही केस श्रम न्यायालय तृतीय कानपुर में 208/1995 दाखिल कर दिया
वर्ष 1990, 1991, 1992 में तीनों वर्ष रेगुलर नौकरी के साथ रेगुलर बीएससी की पढाई विजय त्रिपाठी बीएनडी कॉलेज कानपुर से करते रहे जब श्रम न्यायालय ने केस नंबर 208/1995 मे विजय त्रिपाठी की शैक्षिक योग्यता पूछी तो विजय त्रिपाठी ने श्रम न्यायालय को गुमराह करते हुए खुद को 1995 मे इंटरमीडियड बता फर्जी शपथ-पत्र कोर्ट में दे दिया चूँकि तब केस्को की ओर से विजय त्रिपाठी को केस्को स्नातक साबित नहीं कर सकी वहीं जब केस्को हाईकोर्ट इलाहाबाद में अपील पर गई तो रिट संख्या 26483/1998 में विजय त्रिपाठी ने फिर खुद को इंटरमीडिएट बता हाईकोर्ट को भी झूठा हलफनामा दे दिया कि वो इंटरमीडिएट है और उसने वर्ष 1992 श्रमिक होने के बावजूद केस्को प्रबंधन उससे बाबू का काम लेता रहा जिसके बाद हाईकोर्ट ने विजय त्रिपाठी को बाबू का पद व वेतनमान देने के निर्देश जारी किए और केस्को हाईकोर्ट में चिल्लाता रह गया कि विजय त्रिपाठी ने कभी बाबू का काम ही नहीं किया लेकिन हाईकोर्ट में केस्को विजय त्रिपाठी का स्नातक होना साबित नहीं कर सका 35 साल बाद विजय त्रिपाठी पुत्र आर0 एम0 त्रिपाठी ने सोशल मीडिया फेसबुक पर खुद को स्नातक लिखा जिस पर केस्को महामंत्री दिनेश सिंह भोले की नजर पड़ी
केस्को महामंत्री दिनेश सिंह भोले ने विजय त्रिपाठी के संबंध में हाईकोर्ट इलाहाबाद से लेकर कानपुर यूनिवर्सिटी तक पड़ताल की तो पता चला कि रोल नंबर 50373 वर्ष 1992 कुल अंक 1350 प्राप्तांक 699 बीएनडी कॉलेज से विजय त्रिपाठी स्नातक थे लेकिन फर्जी दस्तावेज के आधार पर पिता पुत्र ने केस्को के साथ ही नहीं हाईकोर्ट के साथ ही करोडों रूपए का फ्राड कर दिया केस्को महामंत्री दिनेश सिंह भोले ने चेयरमैन यूपीपीसीएल आशीष कुमार गोयल को पत्र व साक्ष्य भेजकर जाँच की मांग की जिसपर चेयरमैन यूपीपीसीएल आशीष कुमार गोयल ने जाँच मुख्य अभियंता हाइडिल उत्तम कुमार सक्सेना को दी मुख्य अभियंता हाइडिल उत्तम कुमार सक्सेना ने जाँच केस्को प्रबंधन निदेशक केस्को सैमुअल पॉल एन को दी केस्को एमडी सैमुअल पॉल एन ने जाँच अधीक्षण अभियंता (तकनीकी) पी0के0 सिंह को दी तो पी0के0 सिंह ने छात्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के परीक्षा नियंत्रक राकेश कुमार से रोल नंबर प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष व तृतीय वर्ष के रोल नंबर की जाँच रिपोर्ट देने के लिए पत्र भेजा
कानपुर विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उपरोक्त तीनों रोल नंबर बीएनडी कॉलेज के है तीनों रोल नंबर एक ही व्यक्ति के है और उसका नाम विजय त्रिपाठी है लेकिन तीनों में बाप का नाम मिसमैच है
वर्ष 1990 प्रथम वर्ष रोल नंबर 8966 बीएनडी कॉलेज कानपुर विजय त्रिपाठी पुत्र राममनोरथ
वर्ष 1991 द्वितीय वर्ष रोल नंबर 27963 बीएनडी कॉलेज कानपुर विजय त्रिपाठी पुत्र राममनोहर
वर्ष 1992 तृतीय वर्ष रोल नंबर 50373 विजय त्रिपाठी पुत्र आर0 एम0 है प्राप्तांक 699 सही है द्वितीय श्रेणी भी सही है
और यह होना भी था क्योंकि विजय त्रिपाठी ने हाइकोर्ट में भी अपने बाप के चार अलग अलग नामों का उल्लेख अपने दस्तावेजों में किया है राममनोरथ,राममनोहर, आर0एम0, रा0म0, का उल्लेख हाईकोर्ट इलाहाबाद में विजय त्रिपाठी के द्वारा ही किया गया है अब मामले में केस्को महामंत्री दिनेश सिंह भोले ने कानपुर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय और केस्को प्रबंधन सहित चेयरमैन यूपीपीसीएल आशीष कुमार गोयल को पत्र लिखकर पूछा है कि एक व्यक्ति के तीन बाप तो हो नहीं सकते हैं विजय त्रिपाठी कार्यकारी अधिकारी केस्को मुख्यालय के बापों की स्थिति स्पष्ट करें फिलहाल केस्को ने इस पर भी जाँच शुरू कर दी है |