108 एम्बुलेंस ड्राइवरों का कारनामा : स्ट्रेचर फंसने का बहाना, रात-रात भर आराम है फरमाना!
- जीएसवीएम प्रिंसिपल ने पकड़ा सरकारी एंबुलेंस ड्राइवरों का जिओ टैगिंग स्कैम
- परिसर में यहां वहां खड़े रहकर जाम न लगवाने वाली एम्बुलेंसों को हटवाया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। हाल में जिले के सीएमओ ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन को एक सूचना भेजी कि शहर भर से जीएसवीएम के संबद्ध हैलट अस्पताल जाने वाली 108 एम्बुलेंस कई कई घंटों के लिए वहीं फंसी रहती हैं। इससे जरूरतमंद मरीजों को अक्सर एंबुलेंसें उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। इसपर जीएसवीएम प्रिंसिपल डॉ संजय काला ने तुरंत हैलेट के अधिकारियों से मामले को देखने को कहा। अधिकारियों ने अपने परिसर में यहां-वहां खड़ी रहने वाली 108 एम्बुलेंस चालकों से इस बारे में पूछा। तब ड्राइवरों ने कह दिया कि उनकी 108 एम्बुलेंसों के जिन स्ट्रक्चरों पर मरीजों को इमरजेंसी में या वार्ड में ले जाया जाता है, वो स्ट्रेचर घंटों के लिए अंदर ही फंसे रह जाते हैं। अपने स्ट्रक्चरों को वापस लेने के लिए वो खड़े रहते हैं। प्रिंसिपल डॉ काला के अनुसार मामले की गहन जांच करने पर पता चला कि हैलेट इमरजेंसी समेत उनके सभी संबद्ध अस्पतालों में खुद के इतने अधिक स्ट्रेचर हैं कि एम्बुलेंसों के स्ट्रेचर अंदर ले जाने की आवश्यकता ही इन्हीं। वहीं अधिकांश मरीजों को एम्बुलेंस से अस्पताल या वार्ड तक अस्पतालों के ही स्ट्रेचर पर ले जाया जाता है। सवाल ये था कि ड्राइवरों ने झूठ क्यों बोला। प्रिंसिपल के अनुसार कुछ दिन निरंतर जांच और वॉच से पता चला कि डायल 108 एम्बुलेंस ड्राइवर हैलेट आकर, जियो टैगिंग से लोकेशन यहां की दिखाकर, परिसर एम्बुलेंस खंडी कर के घंटों सो जाते हैं, आराम फरमाते हैं। कई बार तो हैलेट परिसर में पीछे की ओर एम्बुलेंसों पार्क करके ड्राइवरों को शराब पीकर पूरी पूरी रात पड़े देखा गया। फिर स्ट्रेचर हैलेट में फंसने का बहना बनाते हैं। इस तथ्य को साक्ष्यों के साथ प्रिंसिपल ऑफिस द्वारा सीएमओ कानपुर नगर को अवगत करवा दिया गया है। प्रिंसिपल डॉ संजय काला का कहना है कि ये हरकत करने वाले ड्राइवर अपनी काहिली और शरारत के चलते हैलेट परिसर में लाइफ सेविंग उपकरणों वाली एम्बुलेंसों तक को फंसा कर रखते थे। मरीज को छोड़कर पीछे की ओर जाकर घंटों यूं ही खड़े रहते। ये हरकत करने वालों में केवल कानपुर नगर के ही 108 एम्बुलेंस ड्राइवर नहीं, बल्कि कानपुर देहात, हमीरपुर, फतेहपुर, इटावा तक के ड्राइवर शामिल हैं। अब उनपर नकेल कसी गई है। लगातार निगाह रखेंगे कि मरीज को उतारने के बाद तुरंत अपने मूल स्थान के लिए रवाना अहो जाए। इन 108 एम्बुलेंसों के परिसर में यहां वहां खड़े रहने से लगातार जाम भी लगता था। आज रूटीन चेक और गश्त के टोरंट इनको हटवाकर हिदायत दी गईं।
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कैंटीन के फेंके भोजन से चूहों की फौज को आमंत्रण
कानपुर। प्रिंसिपल और एसएससी के रूटीन राउंड्स के अंतर्गत, प्रेम रोटी नाम से गरीबों व मरीजों के लिए हैलट परिसर में कैंटीन के आगे खाना बांटते हैं। जिससे वहां कुत्ते और अन्य आवा जानवर एकत्र होते हैं। तीमारदार खाने के बाद बचा हुआ खाना वहीं आसपास फेंकते हैं, इससे वहां बड़ी संख्या में चूहे भी आ जाते हैं। ये चूहे है अस्पताल के आईसीयू और जांच कक्षों में महंगे सामान वी उपकरणों का नुकसान करते हैं। प्रिंसिपल के अनुसार कैंटीन संचालकों को इस निर्देश देकर तुरंत ही समस्या पर काबू करने के निर्देश दिए।