एडवांस्ड कार्डियक प्रक्रिया का उपयोग करके मरीज़ के दिल की धड़कन को किया सामान्य
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | एडवांस्ड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन के माध्यम से एक मरीज़ का सफलतापूर्वक इलाज़ किया है। मरीज़ को बार-बार अचानक असामान्य हृदय गति की समस्या हो रही थी। यह विशेष प्रक्रिया डॉक्टरों को हृदय में मौजूद असामान्य विद्युत संकेतों की पहचान करने और उन्हें समाप्त कर हृदय की धड़कन को सामान्य करने में मदद करती है। यह प्रक्रिया हॉस्पिटल की कार्डियोलॉजी टीम द्वारा की गई। टीम का नेतृत्व कार्डियोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. श्रीपद वसंत खैरनार ने किया। इस इलाज़ से मरीज़ की हृदय गति को स्थिर करने में मदद मिली। मरीज़ श्रीमती प्रेमा देवी को बार-बार दिल की धड़कन तेज़ होने की समस्या हो रही थी। उनकी बीमारी का हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक इलाज किया गया। प्रेमा देवी की स्थिति तब गंभीर हो गई जब उन्हें अचानक ऐसे दौरे आने लगे। तब उनकी हृदय की धड़कन सामान्य स्तर लगभग 70 बीट प्रति मिनट से बढ़कर करीब 200 बीट प्रति मिनट तक पहुँच जाती थी। इससे धड़कन तेज़ होना, चक्कर आना और बेचैनी जैसे लक्षण उन्हें महसूस होने लगे। डॉक्टरों ने इस समस्या को सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया के रूप में पहचाना। इस बीमारी को पैरॉक्सिस्मल सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया भी कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें असामान्य विद्युत संकेतों के कारण हृदय की धड़कन असामान्य रूप से तेज़ हो जाती है। हालांकि दवाएँ कुछ समय तक लक्षणों को नियंत्रित कर सकती हैं, लेकिन बार-बार होने वाले मामलों में हृदय की विद्युत समस्या को ठीक करने के लिए अक्सर एक विशेष प्रक्रिया को अंजाम देने की आवश्यकता होती है।
पारस हेल्थ कानपुर के कार्डियोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. श्रीपद वसंत खैरनार ने कहा, “सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया जैसे हृदय की धड़कन से जुड़े विकार तब होते हैं, जब हृदय में असामान्य विद्युत मार्गों के कारण अचानक बहुत तेज़ धड़कन होने लगती है। ऐसे में मरीज़ों को धड़कन तेज़ होना, चक्कर आना, सांस फूलना या बेचैनी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। कुछ मामलों में दवाएँ लेने के बाद भी ये एपिसोड बार-बार होते रहते हैं।इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी हमें हृदय के भीतर विद्युत संकेतों का विस्तृत अध्ययन करने और असामान्य धड़कन पैदा करने वाले मार्ग की सटीक पहचान करने में मदद करती है। इसके बाद रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन नियंत्रित ऊर्जा का उपयोग कर इस दोषपूर्ण मार्ग को समाप्त कर देता है। इलाज़ के बाद कई मरीज़ों को लंबे समय तक राहत मिलती है और वे तेज़ धड़कन के बार-बार होने वाले एपिसोड के बिना अपनी सामान्य रोजमर्रा की गतिविधियों में लौट पाते हैं। यह धड़कन संबंधी समस्या अचानक भी शुरू हो सकती है और चलने, व्यायाम करने या सोते समय जैसी सामान्य गतिविधियों के दौरान भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए समय पर निदान और इलाज़ अत्यंत महत्वपूर्ण है।”पारस हेल्थ कानपुर के फैसिलिटी डायरेक्टर रजत बजाज ने कहा, “आमतौर पर हृदय से जुड़े विशेष इलाज़ और प्रक्रियाएँ बड़े मेट्रो शहरों में ही उपलब्ध होती हैं। पारस हेल्थ कानपुर में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन की सुविधा उपलब्ध होने से अब हृदय की धड़कन से जुड़ी जटिल समस्याओं वाले मरीज़ अपने घर के नज़दीक ही एडवांस्ड जांच और इलाज़ प्राप्त कर सकते हैं।