मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को लेकर डाक्टरो ने की प्रेसवार्ता
- प्रत्यके 17 फरवरी को मनाया जाता है डाक्टर्स प्रोटेक्शप डे
- वर्ष 2025 में देश भर में 75 हजार डाक्टरो पर दर्ज हुए क्रिमिनल मुकदमें
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। चिकित्सा व्यवसाय में कानूनी अड़चनें एवं डॉक्टरों और अस्पतालों पर मुकदमें लगातार बढ़ते जा रहे हैं। डॉक्टरों पर उपभोक्ता फोरम के अलावा क्रिमिनल मुकदमें दर्ज हो रहे हैं जिससे चिकित्साजगत आहत है। इस बावत को लेकर बाल रोग विभागध्यक्ष डॉ शैलेन्द्र कुमार गौतम, पूर्व विभागध्यक्ष डॉ ए.के. आर्या , डॉ अमितेश यादव एवं मेडिकल लीगो प्रोटेक्शन के अध्यक्ष डॉ जे.केगुप्ता ने एक प्रेसवार्ता कर पत्रकारो को डॉक्टरो पर हो मुकदमो के बारे में जानकारी दी और बताया कि बीते एक वर्ष में पूरे देश भर में लगभग 75 हजार डॉक्टरो पर मुकदमें दर्ज हुए है जो कि बहुत ही आहत करने वाला विषय है।
बाल रोग विभागध्यक्ष डॉ शैलेन्द्र कुमार गौतम ने बताया कि देश के लगभग सभी प्रदेशों में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू है,जिसमें क्लिनिक, अस्पताल आदि में हिंसा पर 3 साल की कैद और पचास हजार जुर्माने का प्राविधान है। इसके बाद भी पुलिस क्लिनिक और अस्पतालों में तोड़फोड़ पर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट में मुकदमा दर्ज नहीं करती है। वहीं इलाज के दौरान मरीज की स्तिथि बिगड़ने या मृत्यु होने पर डॉक्टरों पर क्रिमिनल केस दर्ज होने और गिरफ्तारी को रोकने हेतु सुप्रीम कोर्ट ने जैकब मैथ्यूज बनाम पंजाब राज्य, मार्टिन डिसूजा बनाम मी अशफाक, लतिका कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्जा कुसुम शर्मा बनाम बत्रा हॉस्पिटल के केस में स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है।
- उच्चतम न्यायालय की गाइड लाइन
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी गाइड लाइन में कहा है कि केवल घोर चिकित्सकीय लापरवाही के मामलों में ही डॉक्टरों पर क्रिमिनल मुकदमा दर्ज हो। तथा प्रारंभिक जांच के बाद ही दर्ज हों। क्रिमिनल चिकित्सकीय लापरवाह के मामलों में सीएमओ द्वारा बोर्ड की जांच अनिवार्य हो एवं दोषी पाए जाने पर ही क्रिमिनल मुकदमा चले। डॉक्टरों की अनावश्यक गिरफ्तारी न हो। इलाज के दौरान मृत्यु होने पर गैर इरादतन हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज करने की जगह लापरवाही से मृत्यु की धारा में ही मुकदमा दर्ज हो।