सेगमेंटल थोरैसिक स्पाइनल एनेस्थीसिया पर कार्यशाला का हुआ आयोजन
- शरीर के जिस भाग की सर्जरी वहीं अंग किया जायेगा सुन्न
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। सेगमेंटल थोरैसिक स्पाइनल एनेस्थीसिया पर एक कार्यशाला का आयोजन लाला लाजपत राय चिकित्सालय (हैलट) के सर्जरी विभाग में बने नए ऑडोटोरियम में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथ 7 एयरफोर्स हॉस्पिटल के कमाडोर डॉ मुकुल भाटिया रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ मुकुल भाटिया, उप प्राचार्या डॉ रिचा गिरी , हैलट अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ सौरभ अग्रंवाल व एनाथिसिया विभागध्यक्ष डॉ अपूर्व अग्रवाल ने दीप प्रज्जवलन कर किया। इस मौके पर इंदौर से आए वरि. एनाथिसियस्ट डॉ जावेद खान ने बताया कि जरनल एनाथिसिया से जोखिम बना रहता है ,लेकिन सेगमेंटल थोरैसिक स्पाइनल एनेस्थीसिया से जहां पर सर्जरी करनी हे केवल शरीर का वही हिस्सा सुन्न किया जाता है और मरीज के पूरे होशोहवाश में यह सर्जरी की जाती है। मरीज बातचीत भी करता रहता है। इस सेंगमेंट में मरीज को पूरा बेहोश करने की कोई भी आवश्यता नही पडती है। यह चेस्ट, लिवर, पैलविस और कार्डिक सर्जरी करने में बहुत ही कारगर साबित होगी। उन्होंने बताया कि जैसे -जैसे बीमरियां बढ़ी है वैसे ही चुनौतियां भी सामने आती गई है, लेकिन चुनौतियों को पार कर मरीज को बचाना ही इसका मुख्य उद्देश्य है।एनाथिसिया विभागध्यक्ष डॉ अर्पूव अग्रवाल ने बताया कि सेगमेंटल थोरैसिक स्पाइनल एनेस्थीसिया उन मरीजों के लिए एक उत्कृष्ट और सुरक्षित विकल्प हो सकता है, जो किसी गंभीर बीमारी या उच्च-जोखिम के कारण जनरल एनेस्थीसिया के लिए उपयुक्त नहीं हैं। थोरैसिक सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया का उपयोग आमतौर पर उन रोगियों के लिए किया जाता है जिनकी सर्जरी किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के कारण हो रही हो और जिन्हें जनरल एनेस्थीसिया से अधिक जोखिम होता है। अधिकांश सर्जरी के लिए जनरल एनेस्थीसिया ही मानक उपचार है; हालांकि, इसके कुछ नुकसान भी हैं, जिनमें दवा के दुष्प्रभाव, लंबे समय तक रिकवरी और अपर्याप्त दर्द नियंत्रण शामिल हैं। वर्तमान में, कई सामान्य सर्जरी के लिए थोरैसिक सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया पर नए सिरे से ध्यान दिया जा रहा है। शरीर की वांछित ऊंचाई पर और रीढ़ की हड्डी के अंत बिंदु से ऊपर इंट्राथेकली एनेस्थेटिक्स का इंजेक्शन इन विशेष परिस्थितियों में लाभदायक साबित हुआ है। एनेस्थेसियोलॉजिस्ट रीढ़ की हड्डी को चोट लगने के डर से कोनस मेडुलारिस के अंत से ऊपर स्पाइनल एनेस्थीसिया देने में संकोच करते हैं। हालांकि, थोरैसिक स्पाइनल एनेस्थीसिया को लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी, स्तन कैंसर लम्पैक्टॉमी और पेट के कैंसर की सर्जरी सहित विभिन्न सर्जरी के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी विधि के रूप में प्रदर्शित किया गया है। कार्यशाला में मुख्य रूप से डॉ नरेश अग्रवाल (अमरावली), डॉ रिचा चन्द्रा (बरेली), डॉ प्रवीन दतलवार (रिषीकेश), डॉ शिशिर अग्रवाल (लखनऊ), जीएसवीएम मेेडिकल कालेज के प्रो. एवं सर्जरी विभागध्यक्ष डॉ जी.डी.यादव, अस्थि रोग विभागध्यक्ष डॉ संजय कुमार, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रेनू गुप्ता, डॉ शैली अग्रवाल, मीडिया प्रभारी डॉ सीमा द्विवेदी, पैथालाजी विभाग की प्रो. डॉ चयनिका काला समेत फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे।