जच्चा बच्चा अस्पताल में होगा सुधार - विभागध्यक्ष डॉ सीमा द्विवेदी
- वार्डाे में 3 बेडो पर एक पंखा, मरीज गर्मी से हो रहे बेहाल- रात में मरीजो को होती है दिक्कत , देखने वाला कोई नही
- कई वर्षाे से वार्ड के बाहर कबाड हालत में पडे है बेड
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कालेज से सम्बंद्ध अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज मेटरनेटी हॉस्पिटल (हैलट जच्चा-बच्चा) अस्पताल की रूप रेखा में नवनियुक्त विभागध्यक्ष डॉ सीमा द्विवेदी ने बडे बदलाव करने के सकेंत दिए है। उन्होंने पदभार ग्रहण करने के बाद बुनियानो आवश्यकताओ को और मरीजो को बेहतर सुविधा देने तथा उनके साथ आए तीमारदारो के विश्राम के लिए पर्याप्त स्थान बनाने का मसौदा तैयार किया है। जिसके लिए उन्होेंने प्राचार्य एवं कालेज डीन प्रो. डॉ संजय काला को प्रसतव बना कर भेज दिया है।स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागध्यक्ष डॉ सीमा द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने एक अगस्त, 2026 को विभागध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। अस्पताल में नई व्यवस्थाओ और सरकारी सिस्टम को कैसे दुरूस्त कर पटरी पर लाया जाए इसके लिए उन्होंने उन्होंने बातचीत के दौरान प्राथमिकताओ के बारे जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल को ऐसा बनाना है कि आने वाले मरीजो को ऐसा न लगे कि वह किसी सरकारी अस्पताल या खंडरनुमा जगह पर आए है। इसके लिए अस्पताल का सुन्दरीकरण के साथ ही मरीजो को एक विभाग से दूसरे विभाग चक्कर न लगाना पडे इसके लिए हेल्प डेस्क बनाया जायेगा और एक सहायको को बैठा कर मरीजो की समस्याओ के निस्तारण के लिए उन्हें गाइड किया जायेगा। मरीजो के साथ आने वाले तीमारदारो की व्यवस्था के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि यह एक बडी समस्या है क्यो कि मरीज के साथ आने वाले तीमारदार अक्सर वार्ड के गैलरी में बिस्तर लगा कर लेट जाते है जिससे मरीजो व डाक्टर्स के आवागमन में बहुत ही दिक्कत होती है। इसके लिए तीमारदारो के लिए एक अलग से व्यवस्था करायी जोयगी ताकि वार्ड के अन्दर भीड न हो और मरीज का बिना किसी रूकावट के डाक्टर्स इलाज कर सके। - वार्ड में 3 बेडो पर एक पंखा, मरीज बेहालजच्चा बच्चा अस्पताल में बीते दस वर्षाे में कई विभागध्यक्ष आये और गए ,लेकिन किसी ने भी वार्ड की व्यवस्थाओ में बारे में नही सोचा। सीमएमएस भी कई आए और गए लेकिन अपनी सुविधाओ के अलावा मरीजो के हित के लिए कोई भी ऐसा आधुनिक सुधार नही किया गया जिससे वार्ड में भर्ती मरीजो को राहत मिल सके। अस्पताल के अधिकांश वार्ड में बेड की दशा बहुत ही निंदनीय है साथ ही 3 बेडो पर एक पंखा लगा हुआ है। अब ऐसे में अस्पताल का बाहरी सुन्दरी करण को दिखावा तो दिखाई पडता है ,लेकिन अन्दर की व्यवस्थाएं पूरी तरह से जंग लगे लोहे की तरह हो गई है।- रात में मरीजो को होती है दिक्कत , देखने वाला कोई नहीजच्चा बच्चा अस्पताल में अगर किसी मरीज को देर रात कोई दिक्कत हो गई तो उसके पास राहत पहुंने में 30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक हो सकता है। अक्सर देर रात की ड्यूटी में कुछ वार्डाे में नर्से नदारत रहती है। जेआर से कहने पर वह नर्साे पर बात डाल कर अपना पल्ला झाड लेती है। अब ऐसे में मरीज की तकलीफ पर ध्यान न देना सबसे बडी समस्या है। इस बावत विभागध्क्ष डॉ सीमा द्विवेदी ने कहा कि ऐसी स्थिति चली आ रही थी,लेिकन अब जल्द सुधार देखने को मिलेगा साथ ही कर्मियो की कार्यशैली तथा उनके आचरण को लेकर भी जल्द ही उनमें सुधार दिखने को मिलेगा। - कई वर्षाे से वार्ड के बाहर कबाड हालत में पडे है बेडजीएसवीएम मेडिकल कालेज अब एम्स और एसजीपीजीआई जैसे अस्पताल की सुविधाएं देने का दावा कर रहा है ,लेकिन उनके कालेज से सम्बंद्ध अस्पताल जच्चा बच्चा के बुनियादी ढ़ांचे में बीते दो दशको से कोई भी सुधार नही देखने को मिला है। जच्चा बच्चा के सभागर ओल्ड सिफा की तरफ वार्ड और उसके बाहर कई बेड कबाड की स्थिति में पडे हुए है। इस ओर भी किसी ने ध्यान नही दिया है। विभागध्यक्ष डॉ सीमा द्विवेदी ने कहा कि कालेज प्राचार्य प्रो. डॉ संजय काला लगातार प्रयासरत है। अस्पताल में जल्द सुधाार करवाने और फंड की व्यवस्था करा कर अन्य मूलभूत व्यवस्थाओ में सुधाार करने के लिए प्राचार्य को पत्राचार भी किया जा रहा है।