प्रदेश के 87 कृषि विज्ञान केंद्रों में लगेंगे डोम सीसीटीवी कैमरे, ICT होगी सुदृढ, प्रत्येक केवीके को बजट जारी
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने सोमवार को वर्चुअल बैठक में उत्तर प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के अध्यक्षों एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों को संबोधित किया। बैठक में उन्होंने बताया कि राज्य के लगभग सभी केवीके (87 केवीके) प्रक्षेत्रों में डोम सीसीटीवी कैमरा आधारित निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए भारत सरकार द्वारा प्रत्येक केवीके को पूंजीगत बजट जारी कर दिया गया है। इसमें डोम सीसीटीवी आधारित निगरानी प्रणाली स्थापित करने तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) को सुदृढ़ करने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। आईसीटी मद के अंतर्गत प्रत्येक केवीके को कंप्यूटर सिस्टम, प्रिंटर एवं अन्य आवश्यक आईटी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे कृषि विज्ञान केंद्रों की डिजिटल कार्यक्षमता और अधिक मजबूत होगी। बैठक में अटारी निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह एवं वैज्ञानिकों ने डोम सीसीटीवी कैमरों की स्थापना से संबंधित तकनीकी मानकों एवं कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी कृषि विज्ञान केन्द्रों को बताई। उन्होंने बताया कि प्रत्येक केवीके प्रक्षेत्र में एक उपयुक्त स्थान पर 40 फीट पोल स्थापित कर उस पर 10 मेगापिक्सल के 3 डोम सीसीटीवी HD कैमरे अलग-अलग दिशाओं में लगाए जाएंगे, जिससे प्रक्षेत्र के अधिकतम क्षेत्र की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रक्षेत्र कृषि अनुसंधान, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, प्रशिक्षण एवं कृषि प्रसार गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। प्रस्तावित निगरानी प्रणाली के माध्यम से बुवाई, रोपाई, निराई-गुड़ाई, सिंचाई, फसल प्रबंधन तथा कटाई जैसी गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। इसके साथ ही महिला श्रमिकों की सुरक्षा, प्रायोगिक एवं प्रदर्शन इकाइयों की सुरक्षा, आगंतुकों की गतिविधियों पर निगरानी तथा आवारा एवं जंगली पशुओं से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी यह व्यवस्था सहायक सिद्ध होगी।बैठक में निदेशक अटारी ने सभी केवीके अध्यक्षों से कहा कि शीघ्र आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ कर निर्धारित मानकों के अनुसार डोम सीसीटीवी सेटअप एवं आईसीटी सुविधाओं के क्रय प्रक्रिया पूर्ण कर जल्द से जल्द स्थापित करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक निगरानी व्यवस्था और डिजिटल आधारभूत संरचना के सुदृढ़ होने से कृषि विज्ञान केंद्रों की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं तकनीक-सक्षम बनेगी तथा कृषि अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं कृषि प्रसार कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन में नई गति मिलेगी