16 से 22 जुलाई तक जनपद में मनाया जाएगा भूजल सप्ताह
- वर्षा जल संचयन एवं भूजल पुनर्भरण पर रहेगा विशेष फोकस
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में 16 जुलाई से 22 जुलाई, 2026 तक आयोजित होने वाले भूजल सप्ताह के सफल आयोजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा सप्ताहभर संचालित की जाने वाली गतिविधियों की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए सभी विभागों को आपसी समन्वय से निर्धारित कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि वर्षा जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। शासन के निर्देशानुसार 16 से 22 जुलाई तक जनपद में भूजल सप्ताह का आयोजन किया जाएगा, जिसके अंतर्गत विभिन्न विभाग अपने-अपने दायित्वों के अनुरूप व्यापक जनजागरूकता एवं संरक्षण संबंधी गतिविधियां संचालित करेंगे। उन्होंने निर्देशित किया कि जनपद के सभी अमृत सरोवर, तालाब, चेक डैम, नहरों, पारंपरिक जल स्रोतों एवं अन्य जल निकायों की साफ-सफाई, संरक्षण एवं पुनर्जीवन की कार्यवाही प्राथमिकता से की जाए, ताकि वर्षा का जल व्यर्थ बहकर न जाए और अधिकतम मात्रा में भूजल स्तर बढ़ाने में सहायक हो सके। सभी सरकारी कार्यालयों, संस्थानों एवं सार्वजनिक भवनों में स्थापित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई एवं सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जाए तथा जहां ऐसी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, वहां आवश्यकतानुसार वर्षा जल संचयन प्रणाली एवं रिचार्ज पिट का निर्माण कराया जाए।जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि भूजल सप्ताह के दौरान नलकूपों, चेक डैमों, तालाबों, अमृत सरोवरों, नहरों एवं अन्य जल संरक्षण स्थलों के आसपास वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए तथा इन स्थलों पर विशेष स्वच्छता अभियान भी संचालित किए जाएं। शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया कि जनपद की सभी 90 न्याय पंचायतों के परिषदीय विद्यालयों में जल संरक्षण विषयक चित्रकला, निबंध एवं अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाए। प्रत्येक न्याय पंचायत से दो श्रेष्ठ प्रविष्टियों का चयन करते हुए कुल 180 प्रविष्टियां जनपद स्तर पर भेजी जाएंगी। इसी प्रकार माध्यमिक शिक्षा विभाग प्रत्येक विकासखंड से श्रेष्ठ प्रविष्टियों का चयन करेगा तथा उत्कृष्ट प्रतिभागियों को जनपद स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। जिला पंचायत राज विभाग को जनपद के समस्त कुओं का चिन्हांकन कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण हेतु कुआँ पूजन कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर पेयजल एवं स्वच्छता समितियों की बैठक एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जल संरक्षण से जुड़े सभी स्थलों के आसपास अधिकाधिक वृक्षारोपण कराया जाए तथा नागरिकों को सामूहिक रूप से जल बचाने एवं वर्षा जल संचयन को अपनाने की शपथ दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि भूजल संरक्षण के इस अभियान को जन-जन का अभियान बनाना होगा, तभी भविष्य में जल संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा। बैठक में सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपनी-अपनी विभागीय कार्ययोजना के अनुसार समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से गतिविधियों का संचालन करें तथा भूजल सप्ताह के प्रत्येक कार्यक्रम में जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए जल संरक्षण का व्यापक संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाएं। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे.जैन, जिला हाइड्रोलाजिस्ट, भूगर्भ जल विभाग, जिला पंचायत राज विभाग ,सिंचाई विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।