फसल अवशेष (पराली) जलाना दंडनीय अपराध, उल्लंघन पर लगेगा भारी जुर्माना: जिलाधिकारी
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस हमीरपुर। जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों एवं शासन के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश देते हुए कहा है कि जनपद में फसल अवशेष (पराली), घास-फूस एवं कृषि अपशिष्ट जलाने पर पूर्णतः प्रतिबंध लागू है। उन्होंने समस्त कृषक भाइयों से अपील करते हुए कहा कि खेतों में पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है, बल्कि इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों से खेतों में पराली जलाने के बजाय गहरी जुताई कर फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने का आग्रह किया, जिससे भूमि में कार्बनिक पदार्थ (ऑर्गेनिक मैटर) की मात्रा बढ़ती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में सुधार होता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से उपयोगी सूक्ष्म जीवाणुओं का संरक्षण होता है, मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करने में भी सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था के लिए किसानों की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासनादेश के अनुसार प्रत्येक राजस्व ग्राम में संबंधित लेखपाल की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित की गई है कि उसके क्षेत्र में पराली जलाने की कोई घटना न हो। यदि किसी क्षेत्र में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित लेखपाल के विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत के राजपत्र दिनांक 06 नवंबर 2024 तथा माननीय एनजीटी के निर्देशों के अंतर्गत पराली जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति अर्थदंड अधिरोपित किया जाएगा। इसके अंतर्गत 02 एकड़ से कम क्षेत्र होने पर ₹5,000 प्रति घटना, 02 से 05 एकड़ तक क्षेत्र होने पर ₹10,000 प्रति घटना तथा 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र होने पर ₹30,000 प्रति घटना की दर से जुर्माना वसूला जाएगा।
उन्होंने बताया कि जनपद में अब तक कुल 350 घटनाएं पराली अथवा अवशेष जलने की चिन्हित की गई हैं। सैटेलाइट एवं स्थलीय सत्यापन के उपरांत 87 घटनाएं मेढ़ों पर कूड़ा जलाने की, 07 घटनाएं अन्य जनपदों से संबंधित तथा 70 घटनाएं अपुष्ट पाई गई हैं। इसके अतिरिक्त 174 घटनाएं अज्ञात कारणों, जैसे विद्युत शॉर्ट सर्किट आदि से संबंधित पाई गईं, जबकि केवल 12 घटनाएं किसानों द्वारा पराली जलाने की पुष्टि हुई हैं। इन सभी मामलों में संबंधित कृषकों के विरुद्ध तहसील स्तर पर अर्थदंड अधिरोपित किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।
जिलाधिकारी ने समस्त कृषकों से पुनः अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण, भूमि की उर्वराj शक्ति बनाए रखने तथा आर्थिक दंड से बचने के लिए खेतों में पराली या फसल अवशेष बिल्कुल न जलाएं तथा अन्य किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करें, ताकि स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण के साथ सतत कृषि व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके।