निजीकरण के विरोध में नगर निगम कर्मचारी लामबंद
- 24 घंटे का अल्टीमेटम, ठप हो सकता है शहर का चक्का
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। शहर की सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने के फैसले ने नगर निगम में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। नगर निगम संघर्ष समिति के बैनर तले हजारों कर्मचारियों ने नगर निगम मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन कर हुंकार भरी। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर टेंडर प्रक्रिया निरस्त नहीं की, तो पूरे शहर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
नगर निगम परिसर में आयोजित विशाल आम सभा में कर्मचारी नेताओं ने टेंडर प्रक्रिया को कर्मचारी विरोधी करार दिया। समिति के सदस्य विनोद कुमार ने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा ष्पिछली बार ए टू जेडश् कंपनी को टेंडर देकर निगम को भारी नुकसान हुआ था। कंपनी को संसाधन उपलब्ध कराए गए, लेकिन वह बीच में ही काम छोड़कर भाग गई। हम इतिहास को दोहराने नहीं देंगे। समिति के अन्य पदाधिकारियों, हरिओम बाल्मीकि और रमाकान्त मिश्रा ने कहा कि निजीकरण न केवल कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह जनता के हितों के भी खिलाफ है।
- कार्यालयों में काम कराया बंद, काटी गई बिजली
प्रदर्शन का असर केवल नारों तक सीमित नहीं रहा। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कार्यालय के प्रत्येक अनुभाग में जाकर कर्मचारियों से कार्य बहिष्कार की अपील की।
काम ठपरू जब कुछ कर्मचारियों ने काम जारी रखा, तो प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम परिसर की बिजली काट दी। अंधेरा होने और बढ़ते दबाव के बीच सभी कमरों में काम पूरी तरह ठप हो गया और कर्मियों ने कार्यालयों को बंद करवा दिया।
- संघर्ष समिति की मुख्य मांगें और चेतावनी
टेंडर निरस्तीकरण निजी कंपनी को सफाई का ठेका देने की प्रक्रिया तुरंत रोका जाए। नगर आयुक्त से मांग की गई है कि वे एक दिन के भीतर लिखित आश्वासन दें। अगर उन्होंने समय सीमा के भीतर निर्णय नहीं लिया, तो सफाई कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।\