लोक अदालत में साथ रहने को राजी हुए सात जोड़े
-पिछले लोक अदालत में 2.40 लाख वादों का निस्तारण, इस बार तीन लाख मुकदमें चिन्हित: नोडल रश्मि
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में का शुभारंभ सुबह 9:30 बजे जिला जज अनमोल पाल ने दीप प्रज्जवलित कर किया। जिला जज ने बताया कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य वादकारियों को सुलभ, त्वरित एवं सस्ती न्याय व्यवस्था उपलब्ध कराना है। बताया कि लोक अदालत में शमनीय आपराधिक वाद, लघु दंडनीय प्रकरण तथा सालों से चल रहे ऐसे सिविल वाद जिनमें आपसी सहमति की संभावना हो, उनका निस्तारण किया जाएगा। इस दौरान अलग-अलग माहौल कचहरी में देखने को मिला, किसी दंपत्ति के चेहरे में खुशी के भाव झलक रहे थे तो कोई लंबी दूरियां मिटने पर भावुक हो गया। सालों से एक दूसरे से अलग रह रहे सात दंपत्ति एक दूसरे के साथ जीवन बिताने को राजी हो गए शहर के किदवई नगर थानाक्षेत्र में रहने वाले दंपत्ति एक साल पहले मामूली बात को लेकर अलग हो गए थे, आज न्यायिक अधिकारियों के प्रयास के एक हुए तो पति के आंखों से आंसू छलक पड़े।वह पत्नी व बच्चों को गले लगाकर रोने लगा, जिसके बाद पत्नी भी भावुक हो गई और दोनों ने फिर कभी अलग न होने वचन एक दूसरे को दिया। वहीं पति के बाहर न घुमाने से नाराज होकर मायके में रह रही पत्नी को न्यायिक अधिकारियों ने समझाकर ससुराल भेजा। इस दौरन पति के साथ जाने को लेकर महिला के चेहरे पर खुशी झलकी।गोविंद नगर निवासी पति और साकेत नगर निवासी पत्नी का विवाह फरवरी 2024 में हुआ था। शादी के कुछ दिनों दोनों में युवती चाहती थी कि शादी के बाद उसका पति उसे घुमाने ले जाने, ऐसा न करने पर दोनों के बीच झगड़े शुरू हो गए थी। न्यायिक अधिकारियों के समझाने बुझाने के बाद दोनों एक दूसरे के साथ रहने को राजी हो गए। दोपहर को पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रोहित सिन्हा ने बताया कि अब तक 55 घरेलू विवाद के मामलों में सुलह समझौते के आधार पर निस्तारण हो चुका है, इखास बात यह रही कि सात जोड़े आपसी मनमुटाव मिटाकर एक बार फिर साथ रहने को राजी हो गए। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से एक दूसरे को पति-पत्नी ने माला पहनाकर व गुलाब देकर गिले शिकवे दूर किए। वहीं एक दूसरे का मुंह मीठा कराकर जीवन भर एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ने का वादा किया। राष्ट्रीय लोक अदालत की नोडल अफसर रश्मि सिंह ने बताया कि पिछले लोक अदालत में 2.40 लाख वादों का निस्तारण कराया गया था। इस बार तीन लाख मुकदमें चिन्हित किए गए है, 2.60 लाख मुकदमें निस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया है।