कॉलेजों में दर्जनों एससी-एसटी पदों पर सामान्य वर्ग की नियुक्तियां !
- कालेज के बजाए बंगले पर बेगारी का दबाव डालने का आरोप लगा लैब कर्मी ने साक्ष्य समेत खोले राज
- भीम आर्मी आजाद पार्टी ने अनुसूचित जाति पदों पर सामान्य वर्ग भर्ती पर शासन को जांच के लिए लिखा पत्र
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। महानगर के तीन सबसे प्रतिष्ठित अनुदानित डिग्री कॉलेजों की नियुक्तियों में बड़े फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। मामला है एक ही प्रबंधन द्वारा संचालित डीबीएस पीजी कालेज गोविंद नगर, डीएवी पीजी कॉलेज सिविल लाइंस और किदवईनगर स्थित महिला महाविद्यालय का है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन तीनों कॉलेजों में हुई दर्जनों नियुक्तियों में प्रबंधन ने भारी हेराफेरी की। खासकर 1998 से 2003 के बीच हुई नियुक्तियों में इन कॉलेजों में जमकर हेराफेरी की गई। ब्राह्मण से लेकर पिछड़ा वर्ग तक के कैंडिडेट्स को कूट रचित दस्तावेजों के सहारे एससी/एसटी बनाकर थर्ड और फोर्थ क्लास पदों पर नियुक्त कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में जो साक्ष्य दिए हैं, उनसे प्रथमदृष्टया आरोप गंभीरता से जांच का विषय प्रतीत होते हैं। मूल शिकायत डीबीएस की बॉटनी लैब में फोर्थ क्लास पद पर कार्यरत रविकांत त्रिपाठी ने की है, जिसमें उन्होंने कालेज प्रिंसिपल और प्रबंधन पर कालेज के बजाए जबरन उनके बंगलों पर बेगारी करने के लिए बाध्य करने, विरोध पर उत्पीड़न व शोषण किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पूर्व में भी कालेज प्रबंधन पर ऐसे गंभीर आरोप लगे हैं। मार्च 2022 में ही ऐसी एक शिकायत पर जिलाधिकारी कार्यालय ने कालेज प्रबंधन को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। जवाब में प्रबंधन सचिव ने शिकायती पत्र पर किसी का नाम पता नहीं होने के कारण शिकायत को फर्जी करार दे दिया था। इस बार खुद कालेज के रेगुलर कर्मी ने ही सामने आकर मोर्चा खोला है।
भीम आर्मी के आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के जिलाध्यक्ष अर्पित कुमार आजाद ने तो डीबीएस और महिला महाविद्यालय के प्रिंसिपलों को उनके कॉलेजों में संदेहास्पद भर्ती वाले पदों पर कार्यरत लोगों के नाम भी लिखकर आरटीआई और पत्र से जानकारी मांगी है। उन्होंने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और आयोग तक को पत्र भेजकर तीनों कलेजों में जांच की मांग की है।डीबीएस कर्मचारी रविकांत त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री से लेकर जिलाधिकारी तक, निदेशक व सचिव उच्च शिक्षा निदेशालय, प्रयागराज तक को भेजे शिकायती पत्रों में आरोप लगाया कि कालेज प्रबंधन, प्रिंसिपल और ऑफिस सुप्रिटेंडेंट तक, विगत 10 वर्षों से उनपर कालेज में काम करने के बजाए प्रबंधक के बंगले पर ही काम करने का दबाव बना रहे हैं। इस बेगारी का विरोध करने पर सालों से उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। सर्विस बुक में एंट्रीज नहीं की जा रहीं, अटेंडेंस शीट पर जबरन लीव (छुट्टी) या अब्सेंट दिखाया जा रहा है। कालेज के अधिकारी उनसे मिसबिहेव करके बंगले पर काम करने का दबाव डालते हैं। रविकांत ने अपने शिकायती पत्रों से लेकर कैमरा तक पर दिए बयानों में ये भी आरोप लगाया कि बंगले पर काम करने वाले उनके ही विभाग के दो कर्मचारी हर एक दो महीने बाद कालेज आकर एक साथ अपनी पूरी अटेंडेंस भरते हैं।
रविकांत ने शिकायती पत्रों में आरोप लगाया है कि प्रबंधन ने डीबीएस कालेज में सामान्य और पिछड़ा वर्ग के लोगों को अनुसूचित जाति वर्ग के आरक्षित पदों पर भर्ती कर लिया है। उन्होंने डीबीएस कालेज में आरटीआई लगाकर सूचना भी मांगी है कि अरविंद प्रकाश, सुरेंद्र कुमार (दोनों क्लास थ्री पद पर), श्याम बाबू, प्रेम प्रकाश, उमाकांत और अशोक कुमार (चारों क्लास फोर्थ पर पर) का चयन का कब, किस साल में, कैसे हुआ? और इन सबका चयन सामान्य वर्ग, ओबीसी, एससी या एसटी वर्ग में हुआ, कालेज बताए। हैरत ये की हेराफेरी के साक्ष्य के रूप में शिकायतकर्ता रविकांत ने इन नामों में से कुछ के पैन कार्ड, आधार या वोटर आईडी आईडी कार्ड की फोटोग्राफ व कॉपियां दिखाईं, जिनपर इनके नाम के आगे दीक्षित, द्विवेदी, राठौर, वर्मा, सचान, जायसवाल आदि सरनेम दर्ज थे। वहीं मानव सम्पदा पोर्टल पर डीबीएस के इन कर्मचारियों में कुछ के पिता और पत्नी आदि के नाम के आगे सामान्य जातियों वाले सरनेम लिखे दिखे हैं, जिसके स्क्रीन शॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग शिकायतकर्ता ने प्रेस को उपलब्ध करवाई है।
रविकांत ने इसी प्रकार से कानपुर के सबसे बड़े डीएवी कॉलेज में 19 लोगों के नाम की लिस्ट लगाकर आरटीआई के तहत इनकी भर्ती का ब्योरा मांगा है, तो वहीं किदवई नगर के महिला महाविद्यालय में 5 नियुक्तियों के लिए आरटीआई से जानकारी मांगी है। शिकायतकर्ता के अनुसार आयोग के माध्यम से इन सब कर्मचारियों की असल सर्विस बुक तलब करवाके सघन जांच की जानी चाहिए।
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प्राचार्य बोले प्रबंधन करता भर्तियां, हम नहीं !
डीबीएस कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर एके मिश्रा नियुक्तियों मे गड़बड़ी के आरोप पर कहते हैं कि पहली बात तो ये नियुक्तियां उनके आने से भी पूर्व हुई थीं, फिर भर्ती प्रक्रिया प्रबंधन का काम है, कालेज प्रशासन का उसमें रोल नहीं। कहा कि शिकायतकर्ता रविकांत त्रिपाठी एक पूर्व मंत्री जी के करीबी रिश्तेदार हैं। वो दबाव बनाते हैं, कालेज खुद ही नहीं आते हैं, आरोप निराधार हैं। वहीं भर्तियों में गड़बड़ी पर महिला महाविद्यालय की प्राचार्या अंजू चौधरी और डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल एके दीक्षित ने भी यही जवाब दिया।
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जिम्मेदार बोले समय नहीं
इन कॉलेजों के प्रबंधन सचिव गौरवेंद्र स्वरूप को संपर्क करने पर बोले कि अभी मैं ज़रा व्यस्त हूं, बाद में आपको काल कर लूंगा। लेकिन एक वर्किंग डे से भी अधिक इंतजार के बाद उनके कार्यालय से कोई संपर्क नहीं हुआ।