आईआईटी कानपुर के 59वें दीक्षांत समारोह में 3,104 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां
-मेधावी विद्यार्थियों को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक और निदेशक स्वर्ण पदकों से किया सम्मानित
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ने अपना 59वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया। यह समारोह 3,104 उग विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक रहा। इस वर्ष उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 1,325 स्नातकोत्तर, 1,247 स्नातक तथा ई-मास्टर्स आउटरीच डिग्री कार्यक्रम के 532 विद्यार्थी शामिल थे।विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस समारोह में भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र के अध्यक्ष, आईआईटी कानपुर के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र तथा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित डॉ. पवन गोयनका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के कार्यवाहक अध्यक्ष जयंत पाटिल ने की। इस अवसर पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल भी उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह दो सत्रों में आयोजित किया गया।
पहले सत्र में मुख्य सभागार (मेन ऑडिटोरियम) में संस्थान के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक सहित विभिन्न पदक और पुरस्कार प्रदान किए गए। दूसरे सत्र में विभिन्न व्याख्यान कक्षों (लेक्चर हॉल) में विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से उनकी उपाधियां प्रदान की गईं। यह प्रक्रिया सीनेट पोस्ट-ग्रेजुएट समिति तथा सीनेट अंडर-ग्रेजुएट समिति के अध्यक्षों के नेतृत्व में सम्पन्न हुई। दोनों सत्रों के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी को इस महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बनने का अवसर मिला। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डॉ. पवन गोयनका, अध्यक्ष, भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र, अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार, ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “मैंने जीवन से यह सीखा है कि यह 100 मीटर की दौड़ नहीं है, जिसे शुरुआत के कुछ कदमों में ही जीत लिया जाए। यह एक लंबी इंजीनियरिंग परियोजना की तरह है, जिसमें कई बार असफल प्रयास होते हैं, बार-बार सुधार किए जाते हैं और किसी भी चीज़ का पहला संस्करण शायद ही कभी अंतिम होता है। अक्सर, हमारी सबसे बड़ी सीख और प्रगति कठिन परिस्थितियों से ही शुरू होती है।अगर मैं आपको पांच बातें याद रखने के लिए कहूं, तो वे ये हैं—कभी हार मत मानिए, बड़े सपने देखिए और उन्हें पूरा करने का साहस रखिए, लोगों पर भरोसा कीजिए, कभी यह मत सोचिए कि आप कुछ नया सीखने के लिए बहुत बड़े हो गए हैं, और हमेशा अपने दिल की आवाज़ सुनिए। हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य रखा है। यह केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प है, जो देश की प्रगति को सभी तक पहुंचाने, प्रतिभा को नेतृत्व में बदलने और संभावनाओं को उपलब्धियों में बदलने का आह्वान करता है। जब यह सपना साकार होगा, तब आप अपने जीवन और करियर के सबसे महत्वपूर्ण दौर में होंगे। इसलिए, आज जब आप यहां से आगे बढ़ें, तो अपने साथ एक विचार ज़रूर लेकर जाएं। पचास वर्ष बाद जब आप अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखेंगे, तो आप स्वयं से एक प्रश्न पूछेंगे—मैंने अपने पीछे कैसी विरासत छोड़ी? मेरी आशा है कि आपका उत्तर सरल और गर्व से भरा होगा—‘मैंने विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दिया।”आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के कार्यवाहक अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा, “यह आपका दिन है। आपकी डिग्री के पीछे वर्षों की मेहनत, अनगिनत रातों की पढ़ाई, चुनौतियों का सामना और यहां तक पहुंचने का आपका पूरा सफर छिपा है। मैं आपको, आपके परिवारों और उन सभी लोगों को हार्दिक बधाई देता हूं जिन्होंने हर कदम पर आपका साथ दिया। जब आप आज इस संस्थान से आगे की दुनिया में कदम रख रहे हैं, तो याद रखिए कि आप जहां भी जाएंगे, अपने साथ आईआईटी कानपुर की पहचान और उसकी गौरवशाली परंपरा को लेकर जाएंगे। आपकी शिक्षा आज समाप्त नहीं हो रही है, बल्कि आज से एक नई शुरुआत हो रही है। ईमानदारी, नवाचार और जीवनभर सीखते रहने के मूल्यों को हमेशा अपने साथ रखिए। उस समाज को कुछ लौटाइए जिसने आप पर विश्वास किया और आपके विकास में योगदान दिया है। अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग उस भारत के निर्माण में कीजिए, जिसका सपना हम सभी देखते हैं। बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से मैं वर्ष 2026 के सभी स्नातकों को हार्दिक बधाई देता हूं और उनके उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की शुभकामनाएं देता हूं।”आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मनीन्द्र अग्रवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “पिछले 61 वर्षों में आईआईटी कानपुर ने अनेक पीढ़ियों के विद्यार्थियों को शिक्षित किया है। हर पीढ़ी के सामने अवसर और चुनौतियां अलग-अलग होती हैं, लेकिन जीवन को सार्थक बनाने वाले मूल्य हमेशा एक जैसे रहते हैं
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