41वां दीक्षांत में 82 फीसद मेडल जीतकर छात्राओं ने रचा इतिहास
- शिल्पाचार्य अंचल पी. बिजलानी को प्रदान की गई मानद उपाधि
- 1,07,713 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गई, मेडल दौड़ में छात्राओं का दबदबा
- 92 पीएचडी छात्रों-छात्राओं को मिली उपाधि, 50 छात्रायें
- नई परियोजनाओं का हुआ लोकार्पण एवं शिलान्यास
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर।छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर का 41वां दीक्षांत समारोह गुरुवार को वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में बेहद भव्यता और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। नैक (NAAC) A++ ग्रेड प्राप्त और क्यूएस एशियन यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में विशिष्ट स्थान रखने वाले सीएसजेएमयू का दीक्षांत समारोह इस बार डिजिटल नवाचार, वीरांगनाओं-बेटियों की सफलता और आत्मनिर्भर भारत की नई सोच का गवाह बना। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति एवं उप्र की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के चेयरमैन एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी शामिल हुए। इस वर्ष के दीक्षांत समारोह में बेटियों की मेधा का एक बार फिर बोलबाला रहा।
विवि के कुल 96 पदक प्रदान किए गए, जिनमें से कुल 51 मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक मिले। इन 51 विद्यार्थियों में 42 छात्राएं और केवल 9 छात्र शामिल रहे। पदक प्राप्त करने में बेटियों का प्रतिशत 82.35 फीसद रहा, जिसे देखकर प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राज्यपाल ने स्वयं 25 मुख्य मेधावियों को मंच पर मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त कुल 92 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी, जिनमें 50 महिला और 42 पुरुष विद्यार्थी शामिल रहे। शुभारंभ पर विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या (वार्षिक प्रगति रिपोर्ट) प्रस्तुत की। कुलपति ने प्रगति आख्या पढ़ते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि विश्वविद्यालय अब केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक मानकों के अनुरूप खुद को ढाल रहा है। कुलपति ने सभी छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि जब आप इस परिसर की चौखट से बाहर कदम रखेंगे, तो समाज आपसे केवल एक डिग्री की उम्मीद नहीं करेगा, बल्कि आपके चरित्र और आपकी संवेदनशीलता की कसौटी पर आपको परखेगा। कच्छ चर्म शिल्प के विशिष्ट शिल्पाचार्य और उद्यमी अंचल पी. बिजलानी को कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डी.लिट्.) की मानद उपाधि से विभूषित किया गया। कुलाधिपति ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 हेतु विश्वविद्यालय की उपाधि पंजिका पर डिजिटल हस्ताक्षर कर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं की उपाधियां, अंकतालिकाएँ डिजीलॉकर पर ऑनलाइन माध्यम (बटन दबाकर) द्वारा अपलोड किया गया। दीक्षांत समारोह में बोलते हुए राज्यपाल ने विवि की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा 5 वर्षों में कैंपस में छात्रों की संख्या में 131.7 फीसद की शानदार वृद्धि दर्ज की। इसके साथ ही, एनआईआरएफ, क्यूएस एशिया रैंकिंग और ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स में मिली राष्ट्रीय व वैश्विक पहचान संस्थान के दृढ़ संकल्प और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रमाणित करती है। उन्होंने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में विश्वविद्यालय के प्रयासों को सराहते हुए कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन, रिसर्च और एकेडमिक्स में एआई समावेश तथा 'सस्टेनेबिलिटी डैशबोर्ड' (STARS) की शुरुआत पर्यावरण व आधुनिकता के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संगीत, योग, खेल व मोरल वैल्यूज जैसी समग्र शिक्षा को अनिवार्य करना और अवसाद से जूझ रहे युवाओं के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजी काउंसलिंग की व्यवस्था एक क्रांतिकारी कदम है। देश की रक्षा में तैनात अग्निवीरों को उनकी सुविधानुसार गुरमुखी लिपि व अन्य माध्यमों में ट्रेनिंग देने तथा उनके आश्रितों को शुल्क में छूट देने के फैसले को उन्होंने उच्च सामाजिक दृष्टिकोण का उदाहरण बताया। इसके अतिरिक्त, महिला अध्ययन केंद्र द्वारा गोद ली गई आंगनवाड़ियों में बच्चों के नामांकन में 23% की वृद्धि और अभिभावकों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित होने को जमीनी स्तर पर देश के विकास की मजबूत नींव करार दिया। युवाओं को संदेश देते हुए राज्यपाल ने कहा, "जिस प्रकार हम कपड़ों को निचोड़कर पानी अलग करते हैं, ठीक उसी तरह समाज में जहाँ भी आप जाएँ, अपने ज्ञान को देश सेवा में पूरी तरह निचोड़ दें।" उन्होंने पढ़ाई के साथ कोई न कोई हुनर व कला अवश्य सीखने पर जोर दिया जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाए। राज्यपाल ने अपील की कि जीवन में चाहे आईएएस जैसे किसी भी ऊंचे पद पर पहुँचें, अपने पारिवारिक मूल्यों को कभी न भूलें। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों से अनुरोध किया कि वे शादी या पारिवारिक दायित्वों के बाद अपने करियर और पढ़ाई को सीमित न करें, बल्कि समाज व माता-पिता के त्याग से मिले इस ज्ञान का लाभ राष्ट्र कल्याण में अवश्य दें।मुख्य अतिथि एआईसीटीई के चेयरमैन व डीयू के कुलपति प्रो.योगेश कुमार सिंह ने विद्यार्थियों से कहा, "डिग्रियां तो केवल तालीम के खर्चों की रसीद हैं, असली ज्ञान तो वह है जो आपके किरदार (चरित्र) से झलकता है। उन्होंने युवाओं को जीवन में दर्शक बनने के बजाय खिलाड़ी, कप्तान या 'कोच' बनने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से 'लेने वाले' के बजाय 'दने वाला' (Giver) बनने का आग्रह किया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से हाथ उठवाकर यह संकल्प दिलाया कि वे अपने जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जो देश के हितों के खिलाफ हो। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को पूरा करने की जिम्मेदारी इसी पीढ़ी के कंधों पर है।उच्च शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे उनके माता-पिता का वर्षों का कठिन संघर्ष, उनकी इच्छाओं का दमन और अनगिनत बलिदान छिपे हैं। उन्होंने गुरुओं के मार्गदर्शन को भी इस सफलता का आधार बताया और कहा कि जीवन में माता, पिता और गुरु इन तीनों का स्थान देवताओं के समान (मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव) है और इनके ऋण से कभी उऋण नहीं हुआ जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साझा करते हुए श्री उपाध्याय ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस महायज्ञ में शिक्षा और शिक्षण संस्थाओं की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी शिक्षक, शिक्षार्थी और संस्थान एकजुट होकर देश की प्रगति में अपनी आहुति दें ताकि भारत दुनिया के विकसित राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो सके।विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षांत समारोह में इस बार कुल 1,07,713 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ दी गई, जिनमें 57,348 छात्राएँ (53.24%) और 50,365 छात्र (46.75 %) शामिल हैं। परिसर स्तर पर भी 3208 विद्यार्थियों में से 1609 छात्राएँ (50.15%) और 1599 छात्र (49.84%) हैं। संबद्ध महाविद्यालयों से पास आउट हुए 104413 छात्रों में से 55689 (53.34%) छात्रायें और 48724 (46.67%) छात्र हैं। आँकड़े के आधार पर विवि में महिलाओं की भागीदारी अब शिक्षा का नया चेहरा गढ़ रही है। 41वें दीक्षांत समारोह के अंतर्गत 51 छात्र-छात्राओं को 96 पदक दिये गए। जिसमें से 42 (82.35%) छात्राओं को तथा 9 (17.65%) छात्रों को पदक दिये गए। 30 छात्र-छात्राओं को 33 कुलाधिपति पदक दिये गए, जिसमें 26 (86.66%) छात्राओं को व 4 (13.33%) छात्रों को, जबकि 11 छात्र-छात्राओं को कुलपति पदक दिये गए, जिसमें से 10 (90.90%) छात्राओं को व 1 (9.10%) छात्र को दिया गया। 33 छात्र-छात्राओं को 52 प्रायोजित पदक दिये गए, जिसमें से 28 (84.85%) छात्राओं को व 5 छात्रों को (15.15%) पदक दिये गए। वहीं 92 छात्र-छात्राओं को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई जिसमें से 42 छात्र तथा 50 छात्रायें हैं। दीक्षांत समारोह के दौरान मंच पर कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, शिल्पाचार्य अंचल पी. बिजलानी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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