एक नए नज़रिए से टाइप 2 डायबिटीज को समय रहते कंट्रोल करना- डॉ. ऋषि शुक्ला |
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | डायबिटीज के सही और असरदार इलाज के बारे में बात करते हुए, रीजेंसी हेल्थकेयर, कानपुर के सीनियर डायरेक्टर, एंडोक्राइनोलॉजी, डॉ. ऋषि शुक्ला ने कहा भारत में डायबिटीज के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए, इस बीमारी को ठीक से मैनेज करने और लंबे समय तक कंट्रोल में रखने वाले उपायों की ज़रूरत बहुत ज़्यादा बढ़ गई है। डायबिटीज के इलाज में हुए नए बदलावों ने इसके तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। ये नए तरीके न केवल ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं बल्कि वजन को नियंत्रित रखने और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने जैसे बड़े फायदों में भी मददगार साबित हो रहे हैं। मरीज की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर किए जाने वाले इलाज, जीवनशैली में बदलाव और बीमारी की शुरुआत में ही सही कदम उठाने से टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों की जिंदगी बेहतर हो रही है और लंबे समय में इसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। डॉ. ऋषि शुक्ला ने कहा टाइप 2 डायबिटीज को मैनेज करने का मतलब आज सिर्फ शुगर लेवल को कंट्रोल करना नहीं है। अब असली मकसद मरीज की पूरी सेहत को सुधारना है जैसे वजन को काबू में रखना दिल की बीमारियों के खतरे को कम करना और जिंदगी को बेहतर बनाना। इलाज के नए तरीके न सिर्फ शुगर को अच्छे से कंट्रोल करते हैं बल्कि शरीर की अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं को भी संभालते हैं। लेकिन यह सब तब और भी ज़्यादा असरदार होता है जब मरीज अपनी लाइफस्टाइल बदलें, समय-समय पर जांच कराएं और बीमारी की शुरुआत में ही सही डॉक्टर से सलाह लें।2040 तक लगभग 123.5 मिलियन लोग इस बीमारी की चपेट में होंगे। टियर 1 और टियर 2 शहरों में इस बीमारी के बढ़ने की मुख्य वजहें शहरीकरण, मोटापा, सुस्त जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतें हैं।एनल्स ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित एक बड़े विश्लेषण में, जिसमें 1.7 मिलियन से ज़्यादा भारतीय वयस्कों के डेटा की जांच की गई थी, यह सामने आया कि ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरों और अर्ध-शहरी इलाकों में डायबिटीज की समस्या काफी ज़्यादा है। ये आंकड़े साफ तौर पर इशारा करते हैं कि नए उभरते शहरी केंद्रों में डायबिटीज को सही समय पर संभालने के लिए बीमारी का जल्दी पता लगाना, मरीजों को जागरूक करना, जीवनशैली में सुधार करना और इलाज के आधुनिक विकल्प उपलब्ध कराना बेहद ज़रूरी है।टियर 2 शहरों में टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ते बोझ से यह पता चलता है कि अब इस बीमारी से निपटने के लिए पहले से ज़्यादा जागरूक और मिले-जुले प्रयासों की तुरंत ज़रूरत है। सही जीवनशैली अपनाने के साथ-साथ इलाज के आधुनिक और प्रमाणित तरीकों को मिलाकर लंबे समय में इसके नतीजों को काफी बेहतर बनाया जा सकता है। इससे मरीजों को अपने ब्लड शुगर और पूरे मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
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