सिलाई मशीनों से विभिन्न प्रकार की कढ़ाई एवं सिलाई पर कार्यशाला
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | सीएसए के वस्त्र एवं परिधान विभाग द्वारा "उच्च तकनीकी की सिलाई मशीनों से उन्नत सिलाई एवं विभिन्न प्रकार की कढ़ाई पर कार्यशाला एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण का आयोजन गारमेंट कंस्ट्रक्शन लैब में किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारम्भ अधिष्ठाता डॉ. सीमा सोनकर द्वारा फीता काटकर किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वस्त्र एवं परिधान उद्योग तीव्र गति से तकनीकी रूप से विकसित हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को आधुनिक मशीनों का व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे वे उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।कार्यक्रम का आयोजन प्रभारी डॉ. अर्चना सिंह, प्रोफेसर डॉ. एकता शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऋतु पाण्डेय तथा टीचिंग एसोसिएट डॉ. अंकिता यादव के निर्देशन में किया गया। विद्यार्थियों को आधुनिक एवं उच्च तकनीकी की मशीनों के द्वारा सिलाई एवं कढ़ाई से वस्त्रों को सुसज्जित करने के महत्व से अवगत कराया तथा उन्हें प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।कार्यशाला में उषा इंटरनेशनल के विशेषज्ञ श्री दीपक निगम द्वारा आधुनिक सिलाई एवं एम्ब्रॉयडरी मशीनों का प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है जो कि आगामी तीन दिनों तक चलेगा l उन्होंने विद्यार्थियों को उषा मार्वेला, एल्योर डीलक्स, वंडर स्टिच,वंडर स्टिच प्लस सिलाई एवं कढ़ाई मशीनों की विशेषताओं, संचालन प्रक्रिया तथा विभिन्न उन्नत कार्यों की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को मशीनों पर स्वयं कार्य करने का अवसर प्रदान किया गया, जिससे उन्होंने विभिन्न प्रकार की सिलाई, सजावटी टांकों , एम्ब्रॉयडरी डिजाइनों तथा मशीनों की स्मार्ट सुविधाओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को डिजिटल नियंत्रण प्रणाली, ऑटो थ्रेड कटर, नीडल अप/डाउन सुविधा, विविध प्रकार के स्टिच पैटर्न तथा एम्ब्रॉयडरी डिजाइनों के उपयोग संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही उन्हें आधुनिक परिधान निर्माण में इन मशीनों की उपयोगिता एवं उद्योग में उनकी बढ़ती मांग के बारे में भी अवगत कराया गया।तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उन्नत सिलाई एवं कढ़ाई तकनीकों से परिचित कराना, उनकी तकनीकी दक्षता में वृद्धि करना तथा उन्हें उद्योगोन्मुखी कौशल प्रदान करना था।
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