चिकित्सकों ने किडनी रोगों की बढ़ती समस्या के चलते स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर दिया जोर
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कानपुर शाखा द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन आईएमए के कॉन्फ्रेंस हॉल परेड में किया गया। यह प्रेस वार्ता "विश्व किडनी दिवस"के संबंध में आम जनता को किडनी के विषय में जागरूकता हेतु आयोजित की गई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, प्रोफेसर डॉ. शालिनी मोहन, सचिव, डॉ. दिलीप कुमार सिन्हा, वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ, कानपुर तथा डॉ. देशराज गुर्जर वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ, कानपुर एवम डॉ युवराज़ गुलाटी, गुर्दा रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज कानपुर, डॉ. विशाल सिंह, वित्त सचिव, डॉ. दीपक श्रीवास्तव, वैज्ञानिक सचिव ने संयुक्त रूप से संबोधित किया आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने आए हुए पत्रकार बंधुओं का स्वागत करते हुए बताया कि वर्ड किडनी डे के अवसर पर लोगों को किडनी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर किडनी रोगों की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। डॉ. मेहरोत्रा ने बताया विश्व किडनी दिवस हर वर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है और वर्ष 2026 में यह 12 मार्च को मनाया जा रहा है। यह एक वैश्विक जागरूकता अभियान है, जिसे द्वारा मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गुर्दों के स्वास्थ्य के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना तथा क्रोनिक किडनी डिजीज के खतरों के प्रति सचेत करना है। डॉ. दिलीप कुमार सिन्हा, वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ, ने बताया कि प्रति वर्ष लगभग 20 लाख लोगों के गुर्दे फेल होने के मुख्य कारण निम्नलिखित है मधुमेह डाइबिटीज हाई ब्लड प्रेसर पथरी की बीमारी बार बार पेशाब का इन्फेक्शन यूरिक एसिड को बीमारी दर्द की दवाइया का लम्बे समय तक अनियंत्रित इस्तेमाल बचाव के उपाय खाली पेट शुगर 120mg/dl से नीचे खाने के दो घंटे बाद शुगर 140mg/dl से नीचे ब्लड प्रेसर 130/80 से नीचे दर्द की दवा का लम्बे समय तक इस्तेमाल न करना प्रति वर्ष अपने पेशाब की जांच करना डॉ. देशराज गुर्जर, वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ ने बताया कि क्रोनिक किडनी डिजीज को अक्सर एक "खामोश" बीमारी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते जब तक कि किडनी को काफी नुकसान न पहुँच गया हो। अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जागरूकता और समय पर जांच ही सबसे प्रभावी तरीके हैं।
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