एएनडी कालेज में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में शामिल शिक्षकों ने सांझा किए अपने विचार |
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | 21वीं सदी में युवा वर्ग सामाजिक आंदोलनों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से लोकतंत्र को मजबूत कर रहा है। युवाओं को हर अच्छे और बुरे कामों की बेहतर समझ है। इसलिए अधिकतर युवा देशहित में ही सारे काम कर रहे हैं। इससे लोकतंत्र को मजबूती मिलती है। मंगलवार को बतौर मुख्य अतिथि ये बातें डीआईजी कानपुर रेंज हरीश चंदर ने कहीं। वह शहर के आचार्य नरेंद्र देव नगर निगम महिला महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार (आईसीएसएसआर द्वारा प्रायोजित) को संबोधित कर रहे थे। जिसका विषय- रीडिफाइनिंग सिविक इंगेजमेंट इन द ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी टूवार्ड्स ए स्ट्रांगर डेमोक्रेसी रखा गया था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या प्रोफेसर ऋतंभरा, मुख्य अतिथि डीआईजी रेंज कानपुर हरीश चंदर, मुख्य वक्ता प्रोफेसर शान्तेश कुमार सिंह, विशिष्ट वक्ता प्रोफेसर अश्विनी कुमार दुबे, संयोजक डॉ आकांक्षा गौर के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रोफेसर शान्तेश कुमार सिंह ने कहा सभी की सक्रिय सहभागिता ही समाज का परिदृश्य बदलने में सहायता करेगी। विशिष्ट वक्ता प्रोफेसर अश्विनी कुमार दुबे ने नागरिक सहभागिता को बढ़ाने में सरकारी तंत्र के प्रयासों पर प्रकाश डाला। पूर्ण अधिवेशन-1 सत्र की अध्यक्षता प्रो अनुपम शर्मा तथा सह -अध्यक्षता प्रो आरती सक्सेना ने की। मुख्य वक्ता प्रो प्रवीण कुमार तिवारी ने लोकतांत्रिक शिक्षा एवं नागरिक चेतना पर प्रकाश डाला। पूर्ण अधिवेशन-2 सत्र की अध्यक्षता प्रो आशुतोष सक्सेना तथा सह- अध्यक्षता प्रो संगीता अवस्थी ने की। मुख्य वक्ता प्रो राजीव कुमार सिंह ने लोकतंत्र के ऐतिहासिक एवं राजनीतिक आयामों पर प्रकाश डाला। प्रो अनिल मिश्रा ने कहा नागरिक सहभागिता केवल अधिकारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें कर्तव्यों और नैतिक जिम्मेदारियों का भी समावेश होना चाहिए।धन्यवाद ज्ञापन डॉ सबीना अंसारी एवं संचालन सुश्री दीक्षा सिंह के द्वारा किया गया। गाजियाबाद के एलआर कालेज की प्रोफेसर डा.संध्या शर्मा ने कहा यह विषय समकालीन लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की भूमिका को नए संदर्भों में समझने की आवश्यकता पर बल देता है। डिजिटल तकनीक, सोशल मीडिया, वैश्वीकरण और सूचना क्रांति ने नागरिक सहभागिता के पारंपरिक रूपों को बदल दिया है। अब नागरिक केवल मतदान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नीति-निर्माण, सामाजिक आंदोलनों, ऑनलाइन अभियानों और जनचर्चाओं में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। अध्यक्षता डॉ विवेक कुमार राय तथा सह -अध्यक्षता प्रो अर्चना सक्सेना ने की। प्रो संध्या शर्मा ने डिजिटल युग में नागरिक सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्रों का समन्वय समन्वयक डॉ स्वाति के द्वारा किया गया जिसमें 111 प्रतिभागियों ने ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मोड के माध्यम से अपने शोध पत्रों को प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत और धन्यवाद ज्ञापन डॉ पूजा शुक्ला के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या मे महाविद्यालय की समस्त शिक्षिकाये, शोध छात्र, स्नातक एवं परास्नातक की छात्र एवं छात्राएं उपस्थित रहे।
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